आपके लिए

  इश्क़ मेरे दिल को छोर आँखों में बशर करता हैं
जब रोती हैं निगाहे तो अश्को में गुज़रकरत
बांध दो बाँहों के ताबीज़ गले में मेरे ना-साज़
  तबियत पे ये सीधे असर करता हैं
   मैं तो लिखता ही हूँ बस  आपके लबों
    का पढ़ना मेरे लफ्जो पे मरहम करता हैं
    कोई काटता हैं वनो को दिन-रात जड़ से,मेरे
  गुलज़ार-ऐ-गांव को वो यू वीरान-ऐ-शहर करता हैं
  इश्क़ का घूँट ज़रा धीरे-धीरे लीजिये जैश रगों में बह
       कर ये ज़हर करता हैं|
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One thought on “आपके लिए

  1. Don Schmitt says:

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