उम्मीद..

इस उम्मीद से मत फिसलो,

कि तुम्हें कोई उठा लेगा,

सोच कर मत डूबो दरिया में,

कि तुम्हें कोई बचा लेगा,

ये दुनिया तो एक अड्डा है,

तमाशबीनों का दोस्तों,

गर देखा तुम्हें मुसीबत में तो,

यहां हर कोई मज़ा लेगा|

उड़ रहा था मेरा दिल भी परिंदों की तरह,

तीर जब लग गई तो कोई भी मरहम न हुआ,

देख लेना था मुझे भी हर सितम की अदा,

ऐ सनम तेरे जैसा मेरा कोई दुश्मन न हुआ|

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