दिल से पूछो..

रह गई उम्मीद तो बरबाद हो जाऊँगा मैं

जाइए तो फिर मुझे सच-मुच भुलाते जाइए

ज़िंदगी की अंजुमन का बस यही दस्तूर है

बढ़ के मिलिए और मिल कर दूर जाते जाइए|

किसी शायर से पूछो उल्फ़त की हक़ीक़त क्या है,

जिसने दिल तोड़ के ग़ज़लों का दीवान सजा रखा है|

|

+4

One thought on “दिल से पूछो..

Leave a Reply

Your email address will not be published.