मोहब्बत

थोड़ा सा छुप-छुप कर खुद के लिये भी जी लिया करो

कोई नही कहेगा कि थक गये हो आराम करो|

प्यार वो है जब हज़ार नाराज़गियों के बाद भी

वो बेफ़िक्र सुकून से तुम्हारी ही गोद में सर रख के

सो जाए|

आईना फैला रहा है खुदफरेबी का ये मर्ज

हर किसी से कह रहा है आप सा कोई नही|

मैं शायर हूं मोहब्बत का, इश्क़ से नज्म सजाता हूं

कभी पढ़ता हूं महोब्बत को, कभी  लिख जाता हूं|

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One thought on “मोहब्बत

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